बागेश्वर में 1902 हैक्टेयर जमीन बंजर पड़ी

जिले की अधिकांश खेती नहरों पर निर्भर है, लेकिन नहरों की दुर्दशा के चलते कई हैक्टेयर जमीन बंजर हो चुकी है। सिंचाई विभाग की कई नहरें लम्बे समय से क्षतिग्रस्त हैं। इनकी रिपेयरिंग की ओर विभाग का कोई ध्यान नहीं है, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। नहरों में पानी नहीं होने से किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं। जिले में सिंचाई विभाग की कुल 138 नहरें हैं। इन नहरों से 3,544 हैक्टेयर जमीन को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन वर्तमान में सिंचाई विभाग की 94 नहरों से ही खेतों की सिंचाई हो पा रही है।

इन नहरों से 1642 हैक्टेयर जमीन ही सिंचित हो पा रही है। सिंचाई विभाग की 28 नहरें आंशिक क्षतिग्रस्त हैं, जिससे 1073 हैक्टेयर जमीन सिंचित नहीं होने से बंजर होने के कगार पर है। सिंचाई विभाग की 11 नहरें बंद पड़ी हैं। इन नहरों की रिपेयरिंग का काम नहीं हो पाया है, जिससे 188 हैक्टेयर भूमि असिंचित हो गई है। सिंचाई विभाग ने पांच नहरों को पूर्ण रूप से बंद कर दिया है। इन पांच नहरों के बंद होने से 120 हैक्टेयर जमीन पूरी तरह से बंजर हो गई है। नहरों की दुर्दशा के चलते 1902 हैक्टेयर जमीन की सिंचाई नहीं हो पा रही है।

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