काली, गोरी का संगम भी गंदगी से अछूता नहीं

जौलजीबी में महाकाली और गोरी का संगम होता है। इसी संगम में ज्वालेश्वर महादेव का मंदिर है। जब कैलाश मानसरोवर यात्रा पैदल होती थी तो यात्री ज्वालेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे। यह बात अलग है कि अब यात्री जौलजीबी में नहीं रुकते। जौलजीबी में भी अन्य कस्बों की तरह गंदगी का साम्राज्य है। कस्बे की सारी गंदगी का निस्तारण काली और गोरी में ही किया जाता है। जौलजीबी में 14 नवंबर से व्यापारिक मेला लगता है लेकिन मेले के दौरान भी सफाई के पुख्ता प्रबंध नहीं किए जाते। आज भी इन नदियों के किनारे लोग शौच के लिए जाते हैं। नदी के किनारे फैले रहने वाली गंदगी को कभी साफ नहीं किया जाता। बारिश के सीजन में जब नदियां तट तक भरती हैं तभी खुद ही इसकी सफाई हो जाती है।

जौलजीबी में अब तक वृहद स्तर का कोई सफाई अभियान नहीं चला है। नदियों को साफ करने के लिए न तो सरकारी स्तर पर कोई अभियान चलाया गया और न स्थानीय लोगों ने इसमें रुचि दिखाई। जौलजीबी में महाकाली में मिलने के बाद गोरी का नाम भी महाकाली ही हो जाता है। महाकाली के किनारे नेपाल की तरफ से भी गंदगी पटती रहती है। वहां के कस्बों और गांवों की गंदगी को महाकाली में ही फेंका जाता है। अपने मूल स्रोत से एकदम साफ अवस्था में निकलने वाली यह दोनों नदियां आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचते ही प्रदूषण का शिकार हो जाती हैं।

Read More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *