महाकाली में समा रही धारचूला की गंदगी

लगभग 12 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित कालापानी से निकलने वाली महाकाली में आगे गुंजी से कुटीयांगती नदी और तवाघाट में धौली नदी मिल जाती है। कालापानी से बूंदी के बीच इस नदी में दर्जनों ग्लेशियरों का पानी मिलता है। तवाघाट पहुंचने तक महाकाली का पानी एकदम साफ नजर आता है, लेकिन उससे आगे जैसे ही यह नदी बढ़ती है तो उसके किनारे स्थित सारी आबादी की गंदगी उसमें समाती है। धारचूला में तो हर मोहल्ले के सीवर की गंदगी वर्षों से महाकाली को प्रदूषित कर रही है।

दोबाट से आगे बढ़ते ही नदी में जगह-जगह सीवर की गंदगी, कचरा, कूड़ा आदि गिरता रहता है। देशभर में नदियों को बचाने का अभियान चल रहा है, लेकिन अब तक महाकाली में कभी कोई स्वच्छता अभियान नहीं चला। बताया गया है कि तपोवन, ग्वालगांव, निगालपानी, बलुवाकोट, जौलजीबी में सारी कस्बे और नगर की गंदगी महाकाली में समाती रहती है। धारचूला बाजार के लगभग हर मोहल्ले के सीवर के पिटों के मुंह महाकाली की तरफ खुले हुए हैं। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि जब कभी धारचूला में पेयजल संकट गहराता है तो लोग महाकाली से ही पानी लाकर पीते हैं। मजबूरी के समय लोगों को यह पता नहीं रहता कि नदी में व्यापक स्तर पर गंदगी पटी है।

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