शारदा चुंगी कालोनी के लोगों ने प्रदर्शन किया

शारदा चुंगी कालोनी के लोगों ने कालोनी की सुरक्षा के लिए दीवार का निर्माण कराने की मांग उठाते हुए रविवार को प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा दीवार नहीं बनाए जाने पर वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे। जून 2013 की आपदा में शारदा से हुए  कटाव से स्नानघाट तो ध्वस्त हुआ ही, शारदा चुंगी कालोनी भी बाढ़ की चपेट में आ गई थी। घाट न होने से श्रद्धालुओं को स्नान के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। शासन ने नाबार्ड के तहत 90 मीटर लंबे घाट, जल पुलिस चौकी, वस्त्र चेंजिंग रूम, शवदाह गृह और अस्थि कलश रूम, घसियारा मंडी तक नाले के निर्माण के लिए 7.35 रुपए की योजना स्वीकृत की है।

2.20 करोड़ की पहली किश्त मिलने के बाद कार्यदायी सिंचाई विभाग ने निर्माण शुरू कराया तो वार्ड संख्या एक शारदा चुंगी कालोनी के लोग सुरक्षा दीवार की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए।

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बागेश्वर में 1902 हैक्टेयर जमीन बंजर पड़ी

जिले की अधिकांश खेती नहरों पर निर्भर है, लेकिन नहरों की दुर्दशा के चलते कई हैक्टेयर जमीन बंजर हो चुकी है। सिंचाई विभाग की कई नहरें लम्बे समय से क्षतिग्रस्त हैं। इनकी रिपेयरिंग की ओर विभाग का कोई ध्यान नहीं है, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। नहरों में पानी नहीं होने से किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं। जिले में सिंचाई विभाग की कुल 138 नहरें हैं। इन नहरों से 3,544 हैक्टेयर जमीन को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन वर्तमान में सिंचाई विभाग की 94 नहरों से ही खेतों की सिंचाई हो पा रही है।

इन नहरों से 1642 हैक्टेयर जमीन ही सिंचित हो पा रही है। सिंचाई विभाग की 28 नहरें आंशिक क्षतिग्रस्त हैं, जिससे 1073 हैक्टेयर जमीन सिंचित नहीं होने से बंजर होने के कगार पर है। सिंचाई विभाग की 11 नहरें बंद पड़ी हैं। इन नहरों की रिपेयरिंग का काम नहीं हो पाया है, जिससे 188 हैक्टेयर भूमि असिंचित हो गई है। सिंचाई विभाग ने पांच नहरों को पूर्ण रूप से बंद कर दिया है। इन पांच नहरों के बंद होने से 120 हैक्टेयर जमीन पूरी तरह से बंजर हो गई है। नहरों की दुर्दशा के चलते 1902 हैक्टेयर जमीन की सिंचाई नहीं हो पा रही है।

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एक हैंडपंप के भरोसे कांडा पड़ाव के 350 परिवार

कांडा पड़ाव में रहने वाले 350 परिवार पेयजल के लिए एक हैंडपंप के भरोसे हैं। यहां बनी स्वजल की योजना 10 साल पुरानी है। गर्मियों में जल संकट बढ़ने के कारण लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कांडा पड़ाव के 250 परिवारों के लिए10 साल पूर्व लगभग नौ लाख की लागत से स्वजल परियोजना के तहत बनाई गई योजना में स्रोत से ही पानी कम हो गया है। जबकि वर्तमान में कांडा में पिछले एक दशक में 100 परिवार बढ़ चुके हैं। जल संस्थान की ओर से अलग-अलग स्थानों पर तीन हैंडपंप लगाए गए हैं। इनमें से केवल एक हैंडपंप का पानी ही पीने लायक हैं। Read More

अधर में लटका चम्पावत का सुनियोजित विकास

चम्पावत : जनपद गठन के 20 साल बाद भी मुख्यालय में मास्टर प्लान लागू नहीं हो पाया है। जिससे आए दिन हो रहे बेतरतीब निर्माण के कारण तमाम तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं। नगर सीमेंट कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो रहा है। शुरुआती दौर में तत्कालीन जिलाधिकारी ने मास्टर प्लान की पहल की थी, लेकिन अब यह मामला ठंडे बस्ते में है। विधानसभा चुनाव के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठने वाला है।

15 सितंबर 1997 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने चम्पावत जनपद का गठन किया। तब से जिले के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान की आवाज उठने लगी। जिले के पहले तत्कालीन जिलाधिकारी नवीन चंद्र शर्मा ने इसके लिए पहल की। बकायदा विनोयोजित क्षेत्र के तहत दफ्तर, आवास, विद्यालय, उद्योग, बाजार आदि स्थानों का निर्धारण करते हुए शासन को पत्राचार किया। Read More

मुनस्यारी के गिरगांव के जंगलों में लगी आग

उच्च हिमालयी क्षेत्र मुनिस्यारी के जंगलों में आग की घटना बढ़ती जा रही है। जंगलों में लगी आग लगातार फैल रही है। हर तरफ उठ रहे आग के अंगारे जंगलों के अस्तित्व के लिए खतरा बन गए हैं। आग को देखते हुए वन विभाग सक्रिय हो गया है। मुनिस्यारी क्षेत्र के आसपास पूरा आसमान काले धुएं से घिरा हुआ है। शुक्रवार को गिरगांव व रातापानी के जंगलों में आग लग गई। जिस कारण वन संपदा के साथ-साथ वन्य जीवों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। इन दिनों ठंडे का मौसम होने से कस्तूरी मृग, हिमालयी भालू, तेंदुआ सहित अन्य जंगली जानवर धूप सेंकने के लिए बाहर निकलते हैं, मगर वन्यजीव तस्कर जंगल में आग लगाकर उनका शिकार कर रहे हैं। विभाग तस्करों पर लगाम नहीं लगा पा रहा है। Read More

मिट्टी डाले जाने से दुर्लभ देवदार के अस्तित्व पर संकट

Soil being blown crisis on the existence of rare pine

नगर के विभिन्न स्थानों में मनमाने ढंग से सड़क के किनारे और देवदार वनों में मिट्टी डाले जाने से दुर्लभ प्रजाति के देवदार वृक्षों के अस्तित्व पर संकट पैदा होता जा रहा है। प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने से लोगों के हौसले बुलंद हैं और वह धड़ल्ले से  विभिन्न निर्माण कार्यों से निकलने वाली मिट्टी को सड़कों के किनारे और देवदार वृक्षों के जड़ों में डालते जा रहे हैं।

नगर और आसपास के क्षेत्रों  में निजी तथा सरकारी भवनों का निर्माण करने वाले कुछ लोग जमीन की खुदाई से निकल रही मिट्टी को सरेआम सड़क किनारे और पेड़ों की जड़ों में डंप कर रहे हैं। मिट्टी पेड़ों की जड़ों में डंप किए जाने से देवदार वृक्षों को खतरा पैदा हो गया है। साथ ही सड़क संकरी होने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। मायावती मार्ग, चंपावत मार्ग, जीआईसी रोड आदि स्थानों में जगह-जगह मिट्टी के ढेर लगे हुए हैं। Read More

भनारतोली में पेयजल संकट गहराने लगा

बागेश्वर जिले के भनारतोली गांव में अभी से पेयजल संकट गहराने लगा है। लोगों को क्षेत्र की पेयजल योजना से जरूरत के अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने डीएम से मिलकर भनारतोली में गहराए पेयजल संकट को दूर करने केे लिए एक टैंक स्वीकृत करने की मांग की है।

घटगाड़ के क्षेत्र पंचायत सदस्य हेम चंद्र जोशी के नेतृत्व में डीएम से मिले भनारतोली के ग्रामीणों ने बताया कि जल स्रोत सूखने के कारण उन्हें दो किमी दूर से पानी लाकर प्यास बुझानी पड़ रही है। जिस टैंक से उनके गांव में पानी की आपूर्ति की जाती है, उसी टैंक से एक दूसरे गांव के लिए भी पानी की सप्लाई होती है।

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Govt signs PDA with Upper Trishuli-1

KATHMANDU, Dec 29: The government has signed Project Development Agreement (PDA) with a consortium led by a South Korean government undertaking to build Upper Trishuli-I (216 MW) hydropower project.

Dinesh Kumar Ghimire, joint secretary of the Ministry of Energy and Bo Seukyi, a representative of Nepal Water and Energy Development Company Pvt Ltd (NWEDCL), signed the PDA document on Thursday.

The cabinet had approved the PDA document last week.

According to the PDA, NWEDCL will develop the project in build own operate and transfer (BOOT) model and hand it over to the government after 35 years. The project has to be completed in five years.

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New entity planned to aid land acquisition process

Dec 28, 2016- The Energy Ministry has been mulling establishing an entity to help the Budhi Gandaki Hydroelectric Project Development Committee in land acquisition and rehabilitation of locals who will be displaced by the 1,200 MW scheme.

The proposed body will work with the project development committee and help it to acquire land and resettle the residents, according to the Energy Ministry.

The entity will be headed by a coordinator and consist of experts. Last week, the ministry published a wanted notice for the post of coordinator while the specialists will be picked directly by the government.

“After the organization is formed, the development of Budhi Gandaki Hydro will be expedited,” said Gokarna Raj Pantha.

Presenting the budget statement for this fiscal year, the finance minister had mentioned forming a separate entity headed by a joint secretary-level official to speed up land acquisition and resettlement of the residents.

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Nepal-India panel meet finalises five issues for discussion

KATHMANDU: The first meeting of the Eminent Persons Group (EPG) comprising diplomats from both Nepal and India has finalised for future discussions five issues, including the 1950 Indo-Nepal Treaty of Peace and Friendship signed between the two neighbours — often termed by Nepal as “mother of all treaties” with India

The five issues finalised for future discussions by the two-day meeting here of the Eminent Persons Group-Nepal-India Relations (EPG-NIR) include bilateral political ties, government-to-government relations, economic exchanges, developmental cooperation and social and cultural aspects of the India-Nepal relations.

On Tuesday, the eight-member EPG-NIR, which comprises four members from each country, agreed to review all aspects of bilateral ties, said Bhekh Bahadur Thapa, EPG co-chair from the Nepal side.